Thursday, August 27, 2015

असीम मन

दायें से दायें,
बायें से बायें

दायें से बायें
और
बायें से दायें

विचरण करती है,
मस्तिस्क तरंग,

विचार घूमते है,
फैसले अपनी मंजिल तय करते है,

हर भाव आकार लेता है,

जो भी जिसको समझना है,
देखना है,
सोचना है,
विश्वास करना है,

वैसा ही आकार दिखा देता है,
मस्तिस्क में बैठा
असीमित दिशाओ में व्याप्त
..........असीम मन ।