Friday, September 25, 2015
Thursday, September 24, 2015
Wednesday, September 23, 2015
Tuesday, September 8, 2015
सहज
सहज
स्पंद
भावनाओ
से अभिभूत
आंधी से
प्रत्यक्षता
करते है,
तो सहजता की
झोंपड़ी में,
बैठी,
सरलता,
ना चाहते हुए भी,
कंपित
हो ही जाती है.
स्पंद
भावनाओ
से अभिभूत
आंधी से
प्रत्यक्षता
करते है,
तो सहजता की
झोंपड़ी में,
बैठी,
सरलता,
ना चाहते हुए भी,
कंपित
हो ही जाती है.
Saturday, September 5, 2015
Friday, September 4, 2015
Thursday, September 3, 2015
बंजारा
मंजिले तो
कब की निकली थी,
खुद को पाने को,
सराय-ये-इश्क़ की,
सरकशी
और
मिल के पत्थरो
के एकाकीपन ने,
बंजारा बना दिया.
कब की निकली थी,
खुद को पाने को,
सराय-ये-इश्क़ की,
सरकशी
और
मिल के पत्थरो
के एकाकीपन ने,
बंजारा बना दिया.
Tuesday, September 1, 2015
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