Friday, September 25, 2015

प्रतिबिम्ब

सौंदर्य
कला,
का
प्रतिबिम्ब
है,

असीम,
चेतन,
मस्तिस्क! :) 

Thursday, September 24, 2015

छोड़ने की कला



छोड़ने की
कला,
सीखा दे !! 
हे मौला.

मन की
जकड़न
से बेचैन हु

Wednesday, September 23, 2015

गणन पटल

मस्तिस्क में,
जो भी घटित है,

उसका 
गणन पटल है,

विभाजित,
विसंवादी,
वियोजक,
विकृत,
विषम,
विभेदी,
विस्र्द्ध,
विमुख,
वियोग,
विरुद्ध,
विचित्र,
विशिष्ट,
विसंगत,
विलक्षण,
विनिर्दिष्ट,
विस्तृत,
विशेष,
विविध

Tuesday, September 8, 2015

सहज

सहज
स्पंद

भावनाओ
से अभिभूत
आंधी से
प्रत्यक्षता
करते है,

तो सहजता की
झोंपड़ी में,
बैठी,
सरलता,

ना चाहते हुए भी,

कंपित
हो ही जाती है.

Saturday, September 5, 2015

दुविधा,







दुविधा,
खा
जाती है,

वर्तमान
और भविष्य को

Friday, September 4, 2015

बेचैनियाँ

 
मँजिल
की
बेचैनियाँ

रास्तो से
इश्क़
कर
बैठी है

Thursday, September 3, 2015

बंजारा

मंजिले तो
कब की निकली थी,
खुद को पाने को,


सराय-ये-इश्क़ की,
सरकशी

और

मिल के पत्थरो
के एकाकीपन ने,

बंजारा बना दिया. 

Tuesday, September 1, 2015

जद्दोजहद

जो भी घटता है,
प्रवेश होता है,
हमारी इन्द्रियों में,

चेतना गंभीरता के साथ,
व्यस्त रहती है,
उसकी उलझन
में छुपी सुलझन
की जद्दोजहद में. 

निंद्रा के उन पलो में...

शाक्षी बनते है ,
वो प्रहरी पल,
उन तरंगो के.
जो प्रतिबिंबित
होती है,
चेतन से अवचेतन के द्वार पर.