Thursday, November 21, 2013

कब का मिल लेता

दरवाजा खटखटाके

कब का मिल लेता,

अगर होती वक़्त कि आवाज,
थोड़ी सी संजीदा,

अगर विज्ञानं सुन ने देता आपको,
दिल कि धड़कन,
गुफ़तगू कि विरह,
इश्क़ कि इबादत।


- Nov 11, 13

उद्विकास

अगर डार्विन अंकल कि मानें तो,
हर पल हम उद्विकास कि तरफ,
जा रहे है,
हमारा हर पल संजीदगी से,
उद्विकास में लगा है .

सहमत हु उनसे,
शायद अस्थि-पंजर कि चित्रकारी करके,
कुछ उद्विकास की कहानी पकायी जा सकती है,

कोसिस में हु, कई सालो से,
कि इंसान के व्यवहार कि,
चित्रकारी करू,
कुछ बताऊ कि,
हम विकास कि निशानी है,

भुत और वर्त्तमान में इंसान कि हरकतो
कि चीखो के बीच ,
मेरी ब्रश,
मौन है


- Nov. 10, 13

without electrodes

Love,
complex among all imotions,
. ..
can be understood
without electrodes


- Oct 25, 13

Bepanah ishq me,

Bepanah ishq me,
Inayat hoti hai kavitaye,
..
Akele khayalo me
Wo kashish kaha.


- Oct 16, 13

Aaina

Ishq me, Aaina najar aata hai sabka chehra,
har kisi ko bolta hu aap jaisa koi nahi


- Oct. 1, 13

मस्तिस्क का सह - संबंध

मस्तिस्क का सह - संबंध
सहप्रसरण में खो जाता है।

ऐसा सांख्यिकीय भाव,
शायद नतीजा है,
अवशिष्ट प्यार का  :)
--
brain's correlations,
loss their grip in covariance,

such statistical emotion,
probably resulting from,
residual love. :)


- Sep 25, 13

इश्क से रोशन

मोहब्बत के मंदिर में
जो चोट दिल पे खाए,
मगर, गिला न करे,

सुना है, इश्क से रोशन हो जाता है !


- Aug 10, 13

कोई फलसफा नहीं इश्क का

कोई फलसफा नहीं इश्क का,
जहाँ दिल झुके, वही सर झुका।


- Aug 10, 13

अधूरे प्रेमो के, अभिनय में

काश में भावो को पिरो पाता
तेरी भाषा में,

काश तुम समझती ,
फूलो का खिलना,
सावन की धड़कन,
तड़पती बरसात को,

तो शायद में
धुऎ में
प्यास में ,
तलाश में,
सेंकड़ो अधूरे प्रेमो के,
अभिनय में,
खुद को खो ना जाता।


- August 6, 13

शिकायत है दोस्तों की

शिकायत है दोस्तों की,
की उदास लिखने लगा हु आजकल,

केसे बताऊ,
रुक रुक के
कसक होती है
...
जब दर्द मीठा हो तो,
थम थम के
करार आता है


- July 26, 13

सिरोतनीन

दिल की धडकनों को,
भावो में संजो कर,

इतनी आवाज दी,

कविताये लिख लिख कर
पुकारा !

काश ! तेरा सिरोतनीन स्तर,
भावनाओ को समझने लायक होता,
तो देता मेरी,
दिल की धडकनों को जवाब.

पर, तेरी खता ना थी.

--------------------------
शब्द विशेष:
सिरोतनीन: मस्तिष्क में पाया जाता है, जो हमें यह समझने में समर्थ करता है की, दूसरा क्या महसूस कर रहा है. जैसे; प्रेम जैसी भावनाए 


- July 15, 13

नहीं समझ पाते, कुछ लोग

नहीं समझ पाते,
कुछ लोग

नहीं समझ पाते
कुछ लोग दिल की बाते,

नहीं समझ पाते
कुछ लोग विश्वास,

नहीं समझ पाते
कुछ लोग दोस्ती,

नहीं समझ पाते
कुछ लोग प्रेम,

नहीं समझ पाते
कुछ लोग कविताये,

नहीं समझ पाते,
कुछ लोग सपंद,

नहीं समझ पाते,
कुछ लोग सोन्दर्य,
......

खो देते है कुछ लोग,
जीवन की परिभाषा,
भाग दोड में
प्रतिसपर्धा में,
काम में,
अहंकार में,
जलन में
स्वार्थ में.


- July 15, 13

दूसरी आवाज

इस मदमस्त मौसम में,
एक शणीक सी मुलाकात,
और इश्क की आवाज से,
आनंदित है
चेतना,

शायद ...
ये तूबिनगन के पहाड़ो की गूंज है,
वरना इश्क कहा देता है, दूसरी आवाज. :)



- July 6, 13

The Best Religion


लफ्जो ने

शायरी मुखातिब
होकर खिसक लेती है !
कविताये,
खामोश हो जाती है !
...
आजकल नहीं लिख पाता .
..
लफ्जो ने सब जला
डाला है !


- April 23, 13

Mulakat kar aaya

Aardh ratri ki Khamoshi
Me aap se milna na ho paya,
Par,
Mausme-ishq kitna
khusansibh Hai ,
Ki,
aapki gali me Khilti
aapki khusbhu se,
Mulakat kar aaya hai :)


- April 23, 13

Tanha

27 number,
Ka virag,

Balatoli ke
Ishq me ,

Kitna
Tanha hai !


- April 3, 13 

जुदाई का होसला

तेरी आँखों की हसरत में
इस कदर खो गया हु,

.. सोचता हु..

लाऊं गा कहाँ से,
जुदाई का होसला.


- April 2, 13

Khof me

Ashiksha, garibi,
Mansik tanav ne,

Jiwan-mulyo ka patan
Kar diya hai..

Saramnak hai vartman,
Sharminda hai bhut,
Khof me hai bhavishay,


-March 19, 13

Aam aadmi ke jeewan ki kimat

Desh ke pradhmantri ki najar me,
Aam aadmi ke jeewan ki kimat hai
Lakh..do lakh rupiyee,

Train aapas me bhide,
Kisan ko police goli mare,
Desh ki beti ki izzat se khel kar mara jaye,
Bum fate.
Sima par senik sahid nahi,
sarkar ki nakabiliat se bemaut mare,

To hamare pradhmantri ji,
Do line ka shauk sandesh,
Aur do lakh rupees dene ke kagaj par sign Karne ko,
Badi muskil se 2-4 minute ka samay nikal pate hai.
Isi me kayi bar hafta bit jata hai..

Agar janta jayada shor machaye,
To Brastachar guru pradhanmantri ji ,
janch committee banane ka natak karwa dete hai .


-February 22, 13

Tanhai ne

coffee ka cup ne,
Akhbar ne,
Tanhai ne,

Aapke na aa pane
ke utsav ko jiya
..
Aapke hath se bani, Adarak wali chai ke khayalo ne,
Is khamoshi me,
Khoob Nritay kiya 


-February 14, 13

इतने प्रेम किये

इतने प्रेम किये,
इतनी लडकियों से मिला,

पर किसी में राधा का विराग न मिला,
मीरा जैसे भक्ति न मिली ,
जूलिएट जैसा भाव न मिला,

आस छोड़ चूका था,
दिमाग में बस चूका था, की, प्रेम झूट है,
प्रेम-साहित्य दिवा-सवपन की उपज है,

मुर्दा बन , खाने सोने में जिए जा रहा था,


कल रात को लगा ,
शायद, मेरी ही तरह राधा भी खोज में है , कृष्णा, के

प्रेम से दूर हो, में तो मोबाइल पर गेम ही खेलने में मशगुल था,
राधा, प्रेम से भरी हुई, जन्मो जन्मो की विरह में तल्लीन हाथ हिलाती हुई दिखाई दी,

नजरे मिली, और में खो गया,
टेम्पल-रन लो स्कोर पर ही ख़तम हो गया,

मुझे लगा उसको देख कर की,
शायद में जिन्दा हु,

उसने बस की खिड़की पर अपना हाथ रखा,
मेने भी अपना हाथ रखा,

बस देखती रही,
देखती रही,

में देखता रहा,

बस चलने लगी,
उसका हाथ पूरी बस को सपर्श करता हुआ,
उसकी आँखों का प्रेम दिल को सपर्श करता हुआ,
पीछे चला गया,

5 मीन्ट बाद ख्याल आया,
काश बस से उतर जाता,
तो राधा से मिलना हो जाता.

Photo Sabhar: Ashutosh Dhingra Arts Inc : (Albus "glimpses of Netherlands )

-January 30, 13

मलाल

हे मौला , तेरे इश्क का जवाब नहीं,
हिज्र में, हिज्र का मलाल नहीं .


- January 27, 13

दिल संगम

मन इतना पवित्र हो गया है की..
शरीर ही प्रयाग बन गया है..
दिल संगम ,
भावनाए कुम्भ में सनान कर रही है..
अब कहा जाये.
ऐसी अवस्था में


-January 24, 13

जब तक हम वोट देंगे

इस देश के सपूत,
शहीद होते रहेंगे

जब तक हम
वोट देंगे,

एक अपाहिजों के सामान,
खाने वाले विदेश मंत्री को,

कोयला खाने वाले,
प्रधानमंत्री को,

अभिवयक्ति की सवतंत्रता
ख़तम करने वाले संचार मंत्री को,

खेल का सामान खा जाने वाले,
खेलमंत्री को,

निर्दोषों को पीटने वाले,
गृहमंत्री को ,

खरीददारी में पैसा खाने वाले,
रक्षा मंत्री को ,

देश की गरीब जनता पर जानवरों की तरह
दवाईओ के प्रयोगों की अनुमति देने वाले,
स्वास्थ्य मंत्री को,

किसानो की जमीं खुद हड़प करने वाले,
किसानो को खुदकुशी का माहोल पैदा करने वाले,
कृषि मंत्री को,

आधे देश में अँधेरा कर देने वाले,
ऊर्जा मंत्री को,

अनगिनत अपराधो में लीन,
मंत्रियो को,
....
....
तब तक,
हिंदुस्तान का इतिहास, वर्तमान, भविष्य
देश के बेटे, बेटियों के,
निर्दोष लाल खून से भीगता रहेगा,


-January 9, 13

पा लेती मुझको

अगर बेशर्त प्रेम करती तो ,
पा लेती,

इतने सवालो में उलझा दिया तुमने,
खुद की चेतना को,
अगर दिल की सुनती तो ,
पा लेती,

बार बार अगर ना सोचती,
मेरे वर्तमान के बारे में,
तो, भविष्य को
पा लेती.

भविष्य की
उधेरबुन में,
ना उलझती तो,
पा लेती,

काश, कशिश से मेरी कविताओ में,
खुद को पाया होता तो,
पा लेती मुझको.


-January 1, 13

सही कदम

हफ्ते से देख रहा है देश ,
मीडिया छाप रही है की
प्रधान मंत्री जी गृह मंत्री जी को लिख रहे है,
शिला दिक्षित गृह मंत्री को लिख रही है,
सोनिया जी गृह मंत्री को लिख रहे है,
गृह मंत्री जी पुलिस को लिख रहे है.
हाई कोर्ट पुलिस को लिख रही है,

पता नहीं ऐसा सब क्या लिख रहे है, की
पुलिस लोगो को पिट पिट कर
इन सबके पत्रों का जवाब दे रही है.

आखिर क्यों , ये चंद मिनटों की दुरी पर रहने वाले लोग,
आपस में मिल कर , सही कदम नहीं उठाते.


-December 23, 2012

औरंगजेब की सरकार

देश की बेटियों को
बेरहमी से पुलिस द्वारा पिटा जाता है,
जब वो
देश की बेटी की इज्ज़त की बात करती है,

जब एक गरीब किसान
अपनी जमीन,
सरकार को ना देना चाहता हो तो,
उसको गोली मार दी जाती है,
बेरहमी से जला दिया जाता है.
आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया जाता है,

जब देश की प्रजा,
भ्रस्टाचार मिटाने की बात करते है, तो,
जवाब में,
लाठी खाती है,
मार खाती है,
जेल जाती है,

जब जब हिंदुस्तान में प्रजा अपने अधिकारों की मांग करती है
तो लज्जित होती है,

और बेशरम प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के मुह से,
निंदा के दो शब्द तक नहीं निकलते,

सिर्फ, जनता को भयभीत करने का आदेश दिया जाता है.

लगता है,
औरंगजेब की सरकार है,


-December 22, 2012

जब चरित्र का विकास

जब चरित्र का विकास,
विकास न माना जाये,

जब, विकास का पैमाना,
सिर्फ अर्थ शास्त्र हो,
विदेशियों की गुलामी हो,

तो शायद समझ आता है की,
आखिर क्यों ये पूरी सरकार मौन है,
आखिर क्यों हर २२ मिनट में,
बलात्कार हो जाता है,

देश के प्रधानमंत्री के घर से,
लगभग आधे घंटे/ घंटे की दुरी पर,
एक देश की बेटी की,
इज्ज़त बिखर जाती है,

और देश के लोग अपने झूठे
सभ्यता के नाटक में मशगुल है,
और सरकार अपनी भ्रस्टाचार की नोटंकी में,

लगता है, देश का चरित्र कब का
ख़तम हो गया है,

बाकि बचा ही क्या है,
जो माया कैलेंडर ख़तम करेगा.


-December 18, 2012

कोई मशवरा

जिंदगी आ बेठ, ज़रा बात तो सुन ,
मुहब्बत कर बेठा हु , कोई मशवरा तो दे


-December 13, 2012

तुम क्या जानो तन्हाई

तुम क्या जानो तन्हाई,
टूटे हुए पत्तो से पूछो, जुदाई,

इस बेफिक्र मौसम में,
बेवफा हवाओ में, जैसे रजाई .


-December 7, 2012

बिना भावना के प्रेम

भगत सिंह ने अपना
जीवन अंग्रेजो को,
देश से बाहर निकलने के लिए दिया,

और मनमोहन सिंह ने,
अपना जीवन उनको
वापिस लेन में समर्पित कर दिया है ,

आजादी के साठ सालो में,
दो सो सालो की लज्जित
गुलामी के कारणों को भूल जाना,

लोगो की भावनाओ की अभिवक्ति,
को क़ानूनी अपराध बनाना,

देश के लोगो का, उन्ही के देश में,
विदेशी कंपनियों का नौकर
बनाने का जो जोश और जज्बा,
इनमे दीखता है ,

बहुत चिंताजनक है,

काश इनको कैंब्रिज की पीएचडी के अलावा,
देश प्रेम भी कही सिखने को मिलता.

ऐसा अर्थशास्त्र का ज्ञान,
बिना भावना के प्रेम करने जैसा है.


-December 5, 2012

जैसे छुआ इश्क

जैसे छुआ इश्क
को,
तो आती थी,
रचनाओ की आवाज,
बनती थी कविताये,
बिन बुने,
गज़ले इनायत हो जाती थी.
मौसम की परवाह किये बगेर,
शायरी दिल को थाम लेती थी,

जब इश्क जिया,
तो,
आशिक खुद इश्क बन गया,

मेरा न लिखना
इश्क की इन्तहा है,


-November 29, 2012

जियो तो जिंदगी


बोलो तो बाते,
कहो तो कहानी,
सुनो तो किस्सा,
-----
जियो तो जिंदगी .:) 



-September 11, 2012

प्रेम कहा है, ..

भोतिकता में उलझी सभ्यता,
क्या प्रेम, क्या विरह ,
क्या तरंग, क्या रंग,
क्या भावना, क्या सवेंदना
.......समझेगी,

प्रेम की बाते खूब कर सकते है, सब,
फिल्मे देख कर महसूस करते है,
स्वय को अहसासों की अभिनेत्री....अभिनेता

पर अंदर से खाली ,
नीरस हर्दय में ,
प्रेम नहीं,
बस अभिलाषा है,
चाह है, इच्छा है,
चेष्ठा है सुख की,

पर,

प्रेम कहा है, ..


-August 29, 2012