Wednesday, July 28, 2010

सबसे अलग

‎:) अर्पित उनको
जिनकी हर अदा
जिनकी हर मुस्कान,
हर बात
सबसे अलग है.
...जो हमसे
कभी कभी कफा
हो जाते है
कभी आमंतरित
तो कभी
इग्नोर करते है
जिनको हमारी
वाहियात बाते
अच्छी नहीं लगती
:)
शायद कुछ बात है उनमे
जो और किसी में नहीं :)

Friday, July 23, 2010

हलचल कर गया

सावन की झड़ी में
मीठी मीठी
मृदुल उमंग में
तरल तरंग में
उसका लाल रंग
...का सुट
वो सुंदर काले बाल
वो हिरनी जैसी चाल
नीली झील
की तरह
मेरे शांत
हर्दय में
हलचल
कर गया

लिखा गया : विलहम स्ट्रासे, कल शाम को :)

23 July

बड़े शर्म

बड़े शर्म
की बात है
की हिन्जरो
की सरकार
आज तक
...मुंबई के लोगो
की हत्या
का बदला
नहीं ले पाई


21 July-2010, at 5:29pm

इतनी गर्मी में

इतनी गर्मी में
कमनीय कन्याओं का
बुरा हाल है
आभारी हु
आइस-करीम
...और
ठंडी बीयर
का
जो तरावट देती है
:)


21 July-2010, at 5:04pm

निठल्ला वक़्त


तूबिनगन रहा है अब तक
धुप से जो नावाक़िफ़
आज खूब वाक़िफ़ हुआ..
निठल्ली हवाओं
में खो रहा है
...निठल्ला वक़्त


July 2 at 2:38pm

चाँद और आकाश


अच्छी लगती है
नयी परिभाषाये
पुराने संबंध
पुरानी हंसी और दुख
नदी और जंगल
...प्यार और प्रकाश
चाँद और आकाश


July 1 at 5:09pm

क्या हुस्न

क्या हुस्न है, जमाल है, क्या रंग-रूप है, ..

वो भीड़ में भी जाये तो तनहा दिखाई दे :)


June 25 at 11:05pm

तुम गाओ

मैं मौन रहूँ
तुम गाओ
स्पेन के
सुनहरे दिवस
पर
...तुम सुरभि
बन छाओ



June 24 at 3:11pm

न रह सकी

तू मेरे बिना न रह सकी तो...
कब तेरे बगैर जी सका मैं


June 21 at 5:02pm

बेअसर

धूप आती है न इनमें, न ठंड़ी हवा......,
खिड़कियाँ हो गई ....बेअसर देखिए..


June 20 at 1:16pm

बिखरा

चरित्रहीन मौसम .....
नंगी शाखाओं से उन्मन....
निर्लज दोपहरी.....
मधु-स्तन...
चेहरा गोल...
आँखें सीपियाँ....
नावनुमा भौंहें...
होंठ लिपस्टिक बिन लाल ....
चंचल-अंचल....
यौवनमयि...
मन तो सतरंगी...
भटका, ताना बाना....
उजला कभी...
उच्छल बन....
बिखरा....
.............
उस पर निशान
उंगलियों के मर्दाना।


June 11 at 1:48pm

उसने गरम चाय बनायीं

कल बारिश की बूंदा बांदी में ,
रात के हसींन मौसम में,
उसने गरम चाय बनायीं ,
चाय में अदरक का सवाद,
वाह ताज की रंगत
...उसकी हंसी, वो प्यार , वो मीठास ..
कानो में अभी तक सपन्दित हो रही है
ऐसा लगता है जैसे खवाब था,
शायद खवाब ही था. :)

May 18 at 8:53pm

किताबो के पन्नो को

किताबो के पन्नो को
पलट के सोचता हु,,,
यु पलट जाये
मेरी ज़िन्दगी तो क्या
बात है… :)


May 18 at 8:37pm

इतना आसान नहीं

यू टयूब ने कुछ राजस्थानी गाने सुनाये,
और मुझे पहुंचा दिया राजस्थान ...
19 साल याद आये एक तूफान की तरह...
वापस अपनी जड़ की तरफ लोट आया हु.
आज की शाम काफी उदाश लग रही है,
...बहुत बहुत समय बाद ,
शायद , खुद के समीप जाना,
इतना आसान नहीं है .
जितना किसी दुसरे के


May 10 at 7:41pm

विज्ञान

विज्ञान,
बौद्धिक विकास
और भौतिक संवाद ने
...
बचपन की छोटी-छोटी
खुशियाँ छीन लीं.
बचपन का विश्वास
परिपक्वता का अविश्वास बन
अच्छा नहीं लगता है....


May 7 at 12:25pm

प्रिया

शान्त ....
नीले जल में ....
अपना रूप
निहार रही है
प्रिया..


May 6 at 8:33pm

चेतना की घाटी

चेतना की घाटी में तुम हो........
रिमझिम करती बरसात
........
मैं हूँ आकाश से झूलता
बादलों का चतुरंग.......
क्षण-क्षण अपने बदलते रूपों में
दृश्यमान..... :)


May 6 at 7:29pm

Bhakti

Bhakti me ras hai
taste hai
Dunia sirf
concept hai..


April 25 at 3:19am

बसंती हवा

बसंती हवा ....
मन पागल.....
प्यार की बातें........
सपने, आशा, मोह.......
गरम घूँट......
गुनगुनाती प्याली........
घिर-घिर उमडे..
बादल...
इन्द्रधनुषी धूप..
नशा ही नशा....
बुझती प्यास......
ओम्म्म्मम्म



April 12 at 3:12pm

इश्क़ का

इश्क़ का
कोई भरोसा
नहीं
कब हो जाये :)


April 9 at 9:41pm

वाह राम ! वाह राम .

सोम को आलू मटर .....
मंगल को आलू बेंगन ....
बुध को पालक...
वीर को पकोड़े ...
शुक्र को मलाई कोफ्ता ....
वाह राम ! वाह राम ....
खाने के सिवाय मुझे नहीं...
और कोई काम.....
घर जैसी रोटी और नान ......
लस्सी और चाय का पान !....
और कितना करे गुणगान ......
बोलो जय श्री राम ! :)


April 9 at 2:32pm

जनम ­ जनम के बंजारे हम

जनम ­ जनम के बंजारे हम.......
बस्ती बाँध न पाएगी.......
अपना डेरा वहीं लगेगा.....
शाम जहाँ हो जाएगी।...
जो भी हमको मिला राह में.......
बोल प्यार के बोल दिये ........
कुछ भी नहीं छुपाया दिल में.......
दरवाजे सब खोल दिये .....
निश्छल रहना बहते जाना .....
नदी जहाँ तक जाएगी :)


April 6 at 2:11pm

तेरी हर छुअन के बाद

तेरी हर छुअन के बाद ....
दिल हो जाता है ....
यूँ हरा भरा ....
सुनहरा .....
तेरी ही सुंगंध ....
में डूबा ....
जैसे ......
बरसात के बाद ....
हरी पत्तियां ....
सोनल धूप की छुअन से ,
..............
दिप -दिप सी खिल उठती हैं.....
और फ़िर सब तरफ़.......
हरा भरा सा ..........
मन हो झूमने लगता है...


April 1 at 1:20am

मुहब्बत में

मुहब्बत में परखने जाँचने से फ़ायदा क्या है ......
कमी थोड़ी-बहुत हर एक के शजरे में रहती है ..


April 1 at 1:13am

उदास नेकार

आज नेकार नदी
बिलकुल उदास थी। ....
सोई थी अपने पानी में ....
उसके दर्पण पर-
बादल का वस्त्र पडा था। ...
मैंने उसको नहीं जगाया, ....
दबे पांव घर वापस आया।


March 31 at 3:22am

जर्मनी में घुलता हिंदुस्तान

भारतीय युवक श्याम वर्ण का...
गर्लफ्रेंड उसकी..
चमकते मेदुर बहुत गोरे रंग की ...
जर्मन कन्या....
मैंने दोनों को देखा....
निश्चिन्त बतियाते।.....
सटे परस्पर धीमे-धीमे.....
कभी अविरल कपोल होकर..........
उसने कुछ शरारत की.....
कृष्णशार सरीखी आँखों की.....
इसकी पुतलियाँ कोरों तक.....
आईं घनीं बरौनियों के किनारे तिर....
और कहा उसने ध.त-.....
मैंने देखा जर्मनी में घुलता हिंदुस्तान :)


March 31 at 1:18am

ऐसा क्या लिखूँ

ऐसा क्या लिखूँ इस दौर में........
जो ला सके अमन..........
और दे सके चैन......
जिसे पढ़कर रूह को पहुँचे सुकून....
जिसे गुनगुना कर....
गोरी पनघट से भरे पानी....
जिसे सुन मुर्झाए फूल खिल सकें....
रेगिस्तान हो हरा-भरा....
और समुद्र में भटके नाविक.....
को मिले अपनी दिशा।...


March 30 at 6:10pm

पिघलती कविता

नीली आँखें...
भरा पूरा...
गदराया जिस्म...
उफ़नता यौवन....
अछूता रूप...
शीतल तरुणाई...
इन सब से मिला कर...
बनी हो तुम...
ऐ मेरी पिघलती कविता..


March 30 at 7:47am

मुझे भय है.

जंगल में पेड़ों की भास...
इतनी मादक है...
मुझे भय है....
मैं अगला श्वास लेना
भूल न जाऊँ।


March 30 at 5:23am

दिन के उजाले में

दिन के उजाले में ..
डांस पार्टी वाली लड़की ...
बदल जाती है ..
बेजान पत्थर में ....
और रात होने का
इंतज़ार करती है ....
ज़िंदा होने के लिए..


March 30 at 5:02am

शबनम

शाम खड़ी है
एक चमेली के
प्याले में
शबनम :)


March 29 at 11:28pm

जो कुछ रह गया

जो पूजायें अधूरी रहीं ,
वो व्यर्थ ना गयीं।
जो फूल खिलने से
पहले मुरझा गए ,
और नदियाँ रेगिस्तान
मे खो गईं,
वो भी नूस्त ना हुईं।
जो कुछ रह गया
जीवन में जानता हूँ !!!
निसफल ना होगा ,
जो मैं गा ना सका ,
जो बजा ना सका ,
हे प्रकृती !
वह तुमारे साज़ पे
बजता रहेगा । ।


March 11 at 7:38pm

मोहब्बत को

मोहब्बत को मौसम ने आवाज़ दी ...
दिलों की पतंगें उड़ानों में हैं। :)


March 11 at 7:36pm

100 बच्चे

धृतराष्ट्र के 100 बच्चे थे!
पाण्डु के सिर्फ 5 ऐसा क्यों?
.......................:
जिनकी आंखे होती है
उनको और भी काम होते हैं! :)


March 11 at 5:15pm

कैसा प्यारा मंज़र

कैसा प्यारा मंज़र था
जब देख के अपने साथी को .....
पेड़ पे बैठी इक चिड़िया ने
अपने पर फैलाये थे :)


March 11 at 8:49am

तेरी तस्वीर

धरती कॅन्वस है...
और आकाश है ब्रश...
तेरी तस्वीर ....
फिर भी नहीं बनती....
मेरे हाथ.....
रोक लिए हैं
वक़्त ने... :)


March 9 at 3:18pm

हवा में न जाने

हवा में न जाने
ये कैसा नशा है.....
पिये बिन ही झूमे है
सारा ज़माना. :)


March 9 at 2:15pm

सूरज सर्द मुल्कों के

सूरज हैं
सर्द मुल्कों के,
मूड आता है
तब निकलते हैं। :)


March 8 at 6:27pm

कितनी वीरान

तुबिंगन की सड़कें
कितनी वीरान है...
यह मैंने जाना...
तुम्हारे जाने के बाद :) :) :)


March 8 at 6:12pm

गंध अनोखी

अभी-अभी..
रसोईघर से निकल..
फैली इस पृथ्वी पर..
लहसुन की गंध अनोखी :)


March 8 at 6:05pm

बहुत दिनों बाद

बहुत दिनों बाद खिड़की खोली ...
साफ-साफ दिखता...
काँच के उस पार ....
लगता है...
नयी धूप आएगी....
फूल खिल जाएँगे .......
नई पत्तियाँ उगेंगी .......
वसंत फिर आएगा........
धीरे-धीरे
........................
हम अक्सर क्यों भूल जाते हैं ...
मौसम बदला करते हैं :)


March 5 at 4:02pm

मेरा रास्ता

मेरा रास्ता
मुझसे आगे निकल गया है......
आगे भी मैं हूँ .....
पीछे भी मैं.....
युग-युग तक ...
मैं हूँ ...
और है....
मेरा रास्ता...


March 5 at 3:57pm

प्रणाम

जब लड़की प्रणाम करने
के लिये झुकती है
तो उसके क्या दिखते हैं?
...
उसके संस्कार दिखते है!
.....
और आप जो सोच रहे हो
उससे
आपके संस्कार दिखते हैं!


March 5 at 3:52pm

सपनों की

सपनों की...
हरियाली बन...
खेतों में ..
लहराऊँ....
पवन के झोंकों संग....
उस छोर पहुँच जाऊँ.....
बरसूँ...
निर्जन वन में....
पंछी गाएँ।....
ठंडी धूप में......
देखूँ उनको.......
पंख फैलाये....
लौटूँ....
फिर अपने
घर-आंगन । ..


March 4 at 4:06pm

प्रेम डगरिया ही ऐसी है
जहां न लुटने का ग़म होता :) :)

चंद लम्हों को ही बनती हैं
मुसव्विर आँखें..
ज़िन्दगी रोज़ तो
तस्वीर बनाने से रही

चीख़े मेरा देश

भरी सभा में
द्रौपदी सा
चीख़े मेरा देश,
.........
कब आओगे
कृष्ण
इन कायरों के बीच।.....


March 4 at 3:49pm

एक रिश्ता

एक रिश्ता ........
मस्तिष्क तक पहुंचने की
कोशिश करता........
लहूलुहान हो जाता है
.............
शरीर पर टिकी..........
सभ्यता में......



March 2 at 3:48pm

पछताए

पिता- बेटा,
तुम्हारे दादाजी ने
शादी की
और पछताए।
मैंने शादी की
और पछता रहा हूँ।
अब तुम क्या करोगे?
........
पुत्र : और कर ही
क्या सकता हूँ।
वंश परंपरा निभाऊँगा।
शादी करूँगा
और पछताऊँगा। :)


February 22 at 6:07pm

वो कौन सी बात

वो कौन सी बात है
जो हजारों साल पहले भी
विद्यार्थी कहते थे,
आज भी कहते हैं
और कयामत तक कहेंगे?
................
बस कल से पढ़ाई शुरु.. :)


February 18 at 8:59am

बिन पढ़े

बिन पढ़े
बने महान,
अकबर हों
या रहमान


February 16 at 6:41pm

बन्दर चूके डाल को

बन्दर चूके डाल को,
और आषाढ़ किसान .........
दोनों के ही लिए है
ये गति मरण समान.....


February 12 at 4:15pm

मौसम कैसा भी रहे

मौसम कैसा भी रहे
कैसी चले बयार
.....................
बड़ा कठिन है
भूलना पहला-पहला प्यार :) :)


February 11 at 9:17am

कटी है रात

कटी है रात को
हंगामा गुस्तरी में तिरी....
सहर क़रीब है
अल्ला का नाम ले साक़ी :)


February 10 at 12:53am

बहुत प्यारी-सी लड़की

एक बहुत प्यारी-सी लड़की थी ...
थोड़े से दिनों के लिये वह मिली थी ....
फिर खो गयी इसी शहर में कहीं ..


February 9 at 7:36pm

इश्क़ सुनते

इश्क़ सुनते थे
जिसे हम वो यही है शायद...
ख़ुद-ब-ख़ुद,
दिल में है इक
शख़्स समाया जाता :)


February 4 at 4:57pm

ग़ज़ल प्यार की

कहाँ से ग़ज़ल
प्यार की यह उतरती ....
जो हम उन निगाहों के
मारे न होते :) :) :)



February 3 at 6:28pm

मुहब्बत

कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँ.....
कुछ मुहब्बत भी है फ़ितरतन बदगुमाँ... :) :)


February 3 at 2:36pm

मेरी हर दुआ

मेरी हर दुआ
और आह में
तेरा नाम निकला...
रश्क़ इस बात पे
मैंने
खुदा का भी देखा :)


February 2 at 7:12pm

हिमपात

आज कुदरत ने हिमपात
ज़ोरदार नहीं किया....
बस किया है
हिम का छिड़कान...
रास्ते गीले हैं हल्की-हल्की ....
लकीरों-सी सफ़ेदी है.....
पेड़ों पर,
पत्तों पर जैसे कोई चित्रकार.....
हल्के-हल्के सफ़ेद रंग
करते-करते...
सो गया हो. . .


January 21 at 10:36pm

रोक दिए कदम...

शाम के नज़ारों ने..
रोक दिए कदम...
ठंडी हवा के झोंके
ने सरसराहट....
पैदा की बदन में :)


January 21 at 10:35pm

बैठे-बैठे

बैठे-बैठे
एक लम्बा
अरसा
बीत गया ..



January 21 at 7:24pm

काश!

काश!
प्रेम एक पेड़ हो जाता
............
और दुनिया का इकलौता
तीर्थ वही होता...


January 16 at 3:52pm

प्यास

प्यास भी एक समन्दर है
समन्दर की तरह......
जिसमें हर दर्द की धार....
जिसमें हर ग़म की नदी मिलती हैं....
और हर मौज.....
लपकती है किसी
चाँद से चेहरे की तरफ़..... :)


January 15 at 12:52pm

तुमसे मिलकर...

तुमसे मिलकर...
ऐसा लगा जैसे..
कोई पुरानी और प्रिय किताब....
एकाएक फिर हाथ लग गई हो
.............
समय की खुशबू...
प्राणों में भर गई....
उतर आया भीतर....
अतीत का चेहरा......
बदल गया वर्तमान.....
शायद भविष्य भी ।


January 11 at 3:15pm

लव मैरिज और अरेंज मैरिज

लव मैरिज और अरेंज मैरिज में क्या फर्क है?
---- -------
लव मैरिज में आप अपनी गर्ल फ्रैंड
से शादी करते हो और
अरेंज मैरिज में आप किसी और की
गर्ल फ्रैंड से शादी करते हो!


January 4 at 11:08pm

सलीक़ा

उसको ख़ुश्बू के परखने का सलीक़ा ही नहीं ...
फूल को क़ीमत-ए- बाज़ार से पहचानती है


December 15, 2009 at 1:24pm

ख़्वाब में

ख़्वाब में ...
एक आवाज़ की
दस्तक ने ...
मुझको जगा दिया


December 14, 2009 at 3:07am

इतना कुछ था दुनिया में...

इतना कुछ था दुनिया में...
लड़ने झगड़ने को..
पर ऐसा मन मिला...
कि ज़रा-से प्यार में डूबा रहा....
और जीवन बीत गया..


December 13, 2009 at 11:07pm

बादल

बादल
कभी कभी
चान्द को
ढक लेते हैं ..
कि हमारी
निहारती आंखें
थक न जाएं।


December 13, 2009 at 4:30pm

बर्फ़ की चादर

लहरा रही है
बर्फ़ की चादर
हटा के घास :)


December 12, 2009 at 10:30am

मौसमे इश्क में

मौसमे इश्क में
तन्हाइयां नहीं होतीं.......
तेरे जाते ही
तेरा इंतज़ार आता है।


December 11, 2009 at 5:32pm

दूर

१
फिर मिले
फिर किया वादा
फिर मिलेंगे।
२
बहुत दूर
इतनी दूर से नहीं कह सकते
जो कुछ भी कहना चाहिए

होते करीब तो कहते वह सब
जो नहीं कहना चाहिए

आजीवन ढूंढते रहेंगे
वह दूरी
सही सही जिसमें कही जाएँगी बातें


December 10, 2009 at 5:43pm

पानी हूँ इसलिए

मैं पानी हूँ इसलिए मुझ पर आरोप नहीं लगता
कि मैं बर्फ क्यों बन गया
कि मैं भाप क्यों बन गया
या मैं तब ठंडा क्यों था
और अब गर्म क्यों हो गया हूँ
या मैं हर बर्तन के आकार का क्यों हो जाता हूँ।

फिर भी मैं शुक्रगुजार हूँ कि लोग
मेरे बारे में राय बनाने से पहले यह याद रखते हैं
कि मैं पानी हूँ
और यह सलाह नहीं देते
कि मैं कब तक पानी के परंपरागत गुण धर्म निभाता रहूँगा।


December 10, 2009 at 5:41pm
रचनाकार: विष्णु

:)

वो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की
जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है
सुना है
वो किसी लड़के से प्यार करती है
बहार हो के, तलाश-ए-बहार करती है
न कोई मेल न कोई लगाव है लेकिन न जाने क्यूँ
बस उसी वक़्त जब वो आती है
कुछ इंतिज़ार की आदत सी हो गई है
मुझे
एक अजनबी की ज़रूरत हो गई है मुझे
मेरे बरांडे के आगे यह फूस का छप्पर
गली के मोड पे खडा हुआ सा
एक पत्थर
वो एक झुकती हुई बदनुमा सी नीम की शाख
और उस पे जंगली कबूतर के घोंसले का निशाँ
यह सारी चीजें कि जैसे मुझी में शामिल हैं
मेरे दुखों में मेरी हर खुशी में शामिल हैं
मैं चाहता हूँ कि वो भी यूं ही गुज़रती रहे
अदा-ओ-नाज़ से लड़के को प्यार करती रहे


December 10, 2009 at 1:35pm

पत्थर युग

ऐसा लगता है,जैसे हम,
पत्थर युग की ओर
धीरे-धीरे सरक रहे हैं।
अच्छा है अगर,
सब पत्थर बन जाएं,
कम से कम
ऊंच-नीच की खाई तो
पट जाएगी,
और भावनाएं इस तरह,
लहूलुहान तो नहीं होंगी।


December 10, 2009 at 1:30pm

ताज महल की तरह मुस्कान वाली लड़की

तुम इतनी क्रूर होंगी
जानता न था ....
मन मानता कहाँ था ....
मुझे देख गर्दन घुमाकर
चली गईं तुम ...
और मैं चकित खड़ा था :) :)


:: ताज महल की तरह मुस्कान वाली लड़की के लिए


December 10, 2009 at 2:48pm

प्यार करती रहे

वो शोख शोख नज़र
सांवली सी एक लड़की,
वो किसी लड़के से
प्यार करती है,
चाहता हूँ कि वो यूं ही ...
अदा-ओ-नाज़ से
लड़के को प्यार करती रहे


December 10, 2009 at 1:37pm

तेरी आँखों में

तेरी आँखों में
हमने क्या देखा ....
कभी क़ातिल
कभी ख़ुदा देखा..


December 10, 2009 at 1:20pm

सफ़र का शौक़

सफ़र का शौक़ भी
कितना अजीब होता है ....
वो चेहरा भीगा हुआ
आँसों में छोड़ आए .


December 7, 2009 at 1:35pm

मीत नहीं उम्मीद नहीं

मीत नहीं उम्मीद नहीं है ...
मन मन्दिर है खाली-खाली, ,
होठो होठोग़ज़लें .....
आँखों-आँखों इश्क की लाली ...
कैसे चुप्पी हम न तोड़ें ,
है उसकी हर नज़र सवाली ...
अब जग से क्या लेना देना...
पी ही ली जब प्रेम प्याली...


December 7, 2009 at 12:58pm

मौसम झूमा

जब-जब
मौसम झूमा
हम ने कपड़े फाड़े
शोर किया......
हर मौसम
शाइस्ता रहना
कोरी दुनियादारी है ...


December 6, 2009 at 1:45am

खुदा को भुलाकर

खुदा को भुलाकर
तुझे जब से चाहा...
हुआ है खिताब़
अपना तब से
काफ़िर


December 5, 2009 at 2:18am

उन्हें

उन्हें शौक़-ए-इबादत भी है
और गाने की आदत भी !!! :) :) :)


December 5, 2009 at 1:46am

ओ मेरी मन मोहिनी..

ओ मेरी मन मोहिनी...
सुन री !
अपने प्रेमी को ...
जो गाए है
प्रेम रागिनी :) :) :)


November 25, 2009 at 7:22pm

खुद को नहीं

खुद को नहीं
औरों को देखने के लिए
लगाता हूँ चश्मा,
कि देखूँ मैं कैसा लगता हूँ
उनकी आँखों में
उनकी चुप्पी में,
कि याद आ जाए तो
उन्हें आत्मलीन क्षणों में ...
मेरी भी आइने में
अपने को देखते,
मुस्कराहट के छोर पर.

November 25, 2009 at 5:46pm

साज़िशें

करने लगे हैं
साज़िशें लहर सी ...
इन किनारों से
अब तो किनारा करो...


November 25, 2009 at 5:46pm

विविधता

पौधों की तरह
लोगों की भी
कई किस्में हैं
कई नस्लें हैं

कुछ लोग
गुलाब की तरह
सदा मुस्कुराते हुए
कुछ रजनीगंधा की तरह
सिर्फ शामों में
महकते हुए
कुछ बरगद की तरह
जीवन की
गहराईयों और
सुदूर आकाश तक
फैले हुए
कुछ घास की तरह
गहराईयों और ऊँचाइयों से
अनभिज्ञ
जीवन की ऊपरी तह तक
सिमटे हुए

कुछ सूरजमुखी की तरह
बाह्यमुखी
कुछ छुईमुई की तरह
अंतर्मुखी
कुछ धतूरे की तरह
जहरीले
कुछ नागफनी की तरह
कंटीले
कुछ सदाबहार की तरह
हरदम साथ निभाने वाले
कुछ मौसमी फूलों की तरह
मौसम के साथ बदलने वाले

प्रकृति
कितनी विविधता
तुममें समाई
बहुत जानकर भी
आँखे कहाँ
जिन्दगी को
ठीक से
समझ पाई


November 10, 2009 at 3:04pm

त्रिनेत्र

गुमसुम से इस मौसम में
जब नहीं आती हवाएँ
सूखे होंठों वाली पत्तियाँ
बार-बार चोंचें खोलती चिड़ियाएँ
हरियाली पर लगी फफूँद

कोई भी नहीं आता
खिड़कियों के सामने
पंख फड़फड़ाता

उदास गुज़र जाती हैं
लड़कियाँ
और टहनियाँ
खींचती हैं साँसें

प्यास है चारों तरफ़
हाथ फैलाए

हो गया है
सोने का वक़्त

उड़ गई है नींद !


November 24, 2009 at 3:06am

जो भी हो उत्तर भिजवाओ

क़लम तोड़ते बचपन बीता,
पाती लिखते गई जवानी,
लेकिन पूरी हुई न अब तक,
दो आखर की प्रेम-कहानी,
और न बिसराओ-तरसाओ,
जो भी हो उत्तर भिजवाओ ,,
जपते उनका नाम यहाँ हम ...
यौवन में बनकर संन्यासी....
सावन बिना मल्हार बीतता,
फागुन बिना फाग कट जाता, :)

November 24, 2009 at 3:04am

तूफानों का प्यार

लहरों के स्वर में
कुछ बोलो ...
इस अंधड में
साहस तोलो...
कभी-कभी मिलता
जीवन में
तूफानों का प्यार


November 23, 2009 at 12:14am

उमड़ी घटा

उमड़ी घटा ..
दीवाने बदरा ..
शोर मचाये ..
नाचा मन मोर भी...
पर तुम न आये ...
बिखरी जुल्फों को ....
अब कौन सुलझाए ... :)


November 19, 2009 at 1:42am

ताज महल की तरह मुस्कान वाली लड़की

मैं निकला था अपने घर से... ..
ताज महल की तरह मुस्कान वाली
लड़की ने मन मोह लिया.. :) ..
मेरे सपने सजने लगे, ..
मुस्कान के मोह में खो गया .
-- -- -- ...
कुछ दिनों के बाद...
वह मुस्कान भरा चेहरा
गंभीर हो गया .. ..
मुस्कान की जगह
एक गंभीर छाया बन गई .. :)


November 16, 2009 at 6:20pm

निकला न करो

निकला न करो
घर से ऐ दोस्त .. :)


November 16, 2009 at 5:54pm

जिंदगी को जानने

मैं निकला था
अपने घर से,
जिंदगी को जानने।
रास्ते में तुम मिले
और
मैं दीवाना हो गया :)


November 16, 2009 at 12:11pm

रात की सी बात

रात
में भी
रात
की सी
बात
नहीं है

November 14, 2009 at 3:45am

ऊँचाई है या मज़ाक......

ऊँचाई है या मज़ाक......
यह कौन-सी......
इंजीनियरी है.....
कि नीचे से
ऊपर देखने के लिए...............
लेटना ज़रूरी है।



November 14, 2009 at 3:42am

एक दिल ही तो था

एक दिल ही तो था ..
जो अब नहीं है...
एक तुम ही तो थे...
जो अब नहीं हो....
मैं न तब था.....
न अब हूँ..


November 14, 2009 at 3:39am

photography

only two hard things
in photography;
which way to point
the camera
and
when to release
the shutter ... :)

November 12, 2009 at 6:19pm

अब न बतियाती राधा

पनघट पर आती ...
कोई राधा ..
अब न बतियाती ....
पनियारी हैं आँखें ....
अभिशप्त से हैं अधर ....
विधुर-सा लगता सारा गाँव ।


November 10, 2009 at 5:07pm

स्त्री की नींद

उसने स्त्री की
नींद में प्रवेश किया
एक स्वप्न की तरह नहीं

उसने स्त्री की
देह में प्रवेश किया
एक आत्मा की तरह नहीं

देह के हर छिद्र को
खोलता हुआ
वह टहलता रहा

स्त्री के यथार्थ में
स्त्री ने मन के
सभी दरवाज़े खोल दिए

उसने मन में प्रवेश नहीं किया

एक रात जब वह
प्रवेश कर रहा था
स्त्री के स्वप्न में
स्त्री के मन के
सभी दरवाज़े खुले थे

वह सभी दरवाज़ों को
बन्द करता हुआ
स्त्री के स्वप्न से निकल कर
किसी दूसरी स्त्री की
नींद में प्रवेश कर गया


November 7, 2009 at 3:14pm

तुम्हें याद है अम्मा

तुम्हें याद है अम्मा
कितनी बार
दे चुकी हो तुम
चढ़ते सूरज को अर्घ्य?

कभी गिनी है तुमने
एकादशी-द्वादशी-त्रयोदशी
जब घर भर की तृप्ति से तृप्त
निराहार सोई हो तुम

कभी जाना है तुमने
आज कौन-सी बार
तुम्हारे दरवाज़े पंडित जी टाँग गए हैं
गये बरस का वर्षफल

द्वार पूजते
दिया माँजते-बाती आँजते
या बित्ते भर धरती पर
राजा-रानी की कथा आँकते
ठाकुर जी के जन्मोत्सव पर
पीताम्बर में फूल टाँकते
कितने वर्ष बीते
तुमने कहा था कभी__
बुढ़िया बैठी कात रही है
चरखा चंदा के घर
सच माना था मैने उसे
फिर भी पूछा था
कहाँ से पाती है
इतनी कपास
कहाँ जाती है वह लंबी डोर
जिसे बुना करती है बुढ़िया
आज सुबह जब
गठियाते हाथों से
सौंपी तूने देहरी पूजा की थाली
तो जाना
देहरी पूजा वह घटना है
जब हर औरत अपनी बारी से
बन जाती है
चरखे पर बैठी बुढिया
हर रोज़ जो खिलता है
कपास-सा-फूल
हमारे आँगन के पूरब में
उसे ही कात रही है पल-पल
और सृष्टि को टेर रही है
कोख़ के भीतर से

आज समझ पाई हूँ अम्मा
क्यों याद नहीं है तुमको
कब जन्मी थी तू

किसको याद है भला पूछो
कब जन्मी थी
चाँद के घर में बुढ़िया

November 7, 2009 at 2:19pm

मेरी ख़्वाहिश

मेरी ख़्वाहिश
कि मैं
फिर से
फ़रिश्ता
हो जाऊँ


November 7, 2009 at 3:08pm

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी
किराये का
मकान
बन गयी।


November 7, 2009 at 2:36pm

इच्छाओं का दामन

मैंने हवाओं
के छोर से
बाँध दिया
इच्छाओं का दामन ...
देखता हूँ ...
वे कहाँ तक जाती हैं ।


November 7, 2009 at 2:24pm

शील की सुगंध

भगवान शिव
समान हो
शील की
सुगंध

November 7, 2009 at 2:17pm

कुछ तो बोलो..

अधकाच्ची अधपक्की
भाषा कैसी भी हो
कुछ तो बोलो..

खामोशी की भाषा में
कुछ बातें ठहरी रह जाती हैं
आँखों के भीतर गुमसुम हो
गहरी गहरी रह जाती हैं
मैं कब कहता हूँ मेरे जीवन में
उपवन बन जाओ
मैं कब कहता हूँ तुम मेरे
सपनों का सच बन ही जाओ?

लेकिन अपने मन के भीतर
की दीवारों की कैद तोड कर
शिकवे कर लो, लड लो
या रुसवा हो लो
कुछ तो बोलो..

मैनें अपने सपनों में तुमको
अपनों से अपना माना है
तुम भूल कहो
मैने बस अंधों की तरह
मन की हर तसवीर
बताओ सही मान ली
देखो मन अंधों का हाथी
हँस लो मुझ पर..
मैने केवल देखा है
ताजे गुलाब से गूंथ गूथ कर
बना हुआ एक नन्हा सा घर
तुम उसे तोड दो

लेकिन प्रिय
यह खामोशी खा जायेगी
मेरी बला से, मरो जियो
यह ही बोलो
कुछ तो बोलो..

ठहरी ठहरी बातों में चाहे
कोई बेबूझ पहेली हो
या मेरे सपनों का सच हो
या मेरे दिल पर नश्तर हो
जो कुछ भी हो बातें होंगी
तो पल पल तिल तिल मरनें का
मेरा टूटेगा चक्रव्यूह
या मन को आँख मिलेगी प्रिय
या आँखों को एक आसमान

तुम मत सोचो मेरे मन पर
बिजली गिर कर
क्या खो जायेगा
तुम बोलो प्रिय
कुछ तो बोलो
अधकच्ची अधपक्की
भाषा कैसी भी हो..


November 5, 2009 at 3:16pm

दिल की बस्ती

दिल की बस्ती
पुरानी दिल्ली है...
जो भी गुज़रा है
उसने लूटा है :) :)


November 5, 2009 at 3:32pm

मन

याद-भरा
मन
खो जाता है


November 5, 2009 at 2:54pm

चिड़िया

खिड़की तक आती है
मुझे देखती है,
उड़ जाती है चिड़िया
............
मुझ से क्यों डरती है। ?


November 5, 2009 at 5:30am

शराब

करवटें
लेती है
फूलों में
शराब। :)


November 5, 2009 at 5:21am

कुंदन

जिस्म सौ बार जले,
तब भी वही मिट्टी का ढेला।
रूह इक बार जलेगी,
तो वो कुंदन होगी।।


November 3, 2009 at 2:17pm

मेरी कविता

मेरी कविता
कभी अवज्ञा करती नहीं
तुम्हारे मन के भावों की ..
आशाओं की ...
मैं निष्ठा से सुनता रहता ...
हर धड़कन तेरे दिल की


November 1, 2009 at 3:22am

प्यार

कहीं आसमाँ के नीचे ..
ज़मी से ऊपर..
किसी बादल की तरह...
चाँद सितारों को अपने आँचल में लेकर..
तुम्हारे ख्वाबों में आऊँ..
कुछ यूँ सताऊँ..
तुम्हारी नींद चुराऊँ...
बेचैनी बढाऊँ...
तुम्हारा ख्याल बन जाऊँ...
कोई अह्सास बन जाऊँ...
हवा की तरह...
हवा में मिल जाऊँ..
तुम्हे छू जाऊँ..
प्यार जताऊँ...
कोई ओस की छोटी...
बूँद बन जाऊँ..
किसी फ़ूल की खुशबू ले...
साँस में बस जाऊँ..
कदमों की हल्की आहट बन जाऊँ ...
तुमसे मिल जाऊँ .
बरस जाऊँ ..
तरस जाऊँ



October 29, 2009 at 5:48pm

मक्खी

ग्राहक-
जी लस्सी में
मक्खी है।
दुकानदार-
ओए चुपकर,
दिल बड़ा रख,
ये नन्ही सी
जान
तेरी कितनी
लस्सी पी जाएगी। :)

October 26, 2009 at 4:56pm

जलेबी

गरम गरम
जलेबी
खाने का
दिल
कर रहा है !!! :)

October 26, 2009 at 3:35pm

करारी बात

ठंडी भोर है ..
ठिठुरता मौसम....
तुम कहां हो ? ..
नमकीन सी हवा ...
के साथ ..
करारी सी कोई ...
बात हो जाये ..


October 26, 2009 at 2:18am

अच्छे बच्चे

रोज देखता सुंदर सपना
सुनता सुंदर गान।
ऐ ब हमारी सुनो प्रार्थना...
तुम भी बच्चे बन जाओ।
अच्छे बच्चे बन जाओ।

October 26, 2009 at 2:24pm

बीत गये दिन

बीत गये दिन
भजन बिना रे ।
भजन बिना रे,
भजन बिना रे ॥


October 25, 2009 at 9:08pm

झूमा

जब-जब मौसम झूमा हम ने कपड़े फाड़े शोर किया
हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है

October 23rd, 2009

चिड़िया

सुबह-सवेरे आती चिड़िया,
आकर मुझे जगाती चिड़िया ।
ऊपर बैठ खिड़की पर,
चीं-चीं, चूँ-चूँ गाती चिड़िया ।
जाना है, नहीं ग्रेजुएट स्कूल उसे
न ही दफ़्तर जाती चिड़िया ।

October 23, 2009 at 4:39pm

रास्ते

पक्के रास्ते ना बने तब तक
आते जाते रहो....
यूँ ही चलते चलते
रास्ते बन जाते हैं... :)


October 22, 2009 at 7:06pm

लकीरें

देखो तो
तुम्हारे हाथों में
उसके नाम की लकीरें
कितनी धुँधली हैं...

और उसकी लकीरों में
तुम्हारा नाम लिखा है...

शायद इसीलिए
वह तुमपर
जान छिड़कती है...

....
और तुम्हारी उससे
बस
जान पहचान भर है.....

October 22, 2009 at 6:33pm

For Autumn in Tu

शाख से
सूखे पत्ते
बेआवाज़ ही
गिर जाते हैं....

बेजान चीज़ों से
कब खून
रिसता है

जिंदा हिस्सा
जब जुदा होता है...
...........

जहन में
तब ही
दर्द उठता है......

October 22, 2009 at 6:25pm

मैं पूछूं तुमसे

मत रूठो मुझसे
मेरे स्वामी!
देखो, मैं बन सकती हूँ
तुम्हारी माँ,
मित्र तो हूँ ही मैं,
तुम मानो या नहीं।
वक्त पड़े अगर तो
मैं बन जाउंगी
तुम्हारी दासी भी,
पर मत कहो मुझसे
बनने के लिए
वेश्या तुम्हारी!
कि छटपटाती है
मेरी आत्मा
अदा करने मैं तुम्हे
ये कीमत
तुम्हारे दिए इस
रोटी, कपड़े और मकान की ।
हो सके तो
बना लो मुझे अपनी प्रेमिका,
करो मुझसे प्यार,
और मैं दे दूंगी
वो सब कुछ तुम्हे
जो भी है मेरे पास।
एक बात पूछूं मैं तुमसे?
आई थी मैं तुम्हारे पास,
छोड़ कर सब कुछ अपना,
घर और परिवार।
क्यों नहीं बन पाए
कभी तुम
पिता, भाई और
मित्र मेरे?


October 22, 2009 at 5:42pm

जीवन विकल्प

मुस्कुराते हुए
वेटर की तरह...
जीवन ने जब भी
अपना
मेनू कार्ड सामने किया है....
मैने जाना है
............
एक को छोड़कर
बाकी सब विकल्पों को
खोने का समय है।

October 22, 2009 at 7:43pm

भविष्य

जैसे ही भविष्य शब्द का स्वर निकलता है,
तब तक शब्द का पहला वर्ण
अतीत में जा चुका होता है,
जब सन्नाटा शब्द को बोलता हूँ,
उसी का विनाश करता हूँ
जब कहता हूँ कुछ नहीं,
कुछ नया बनता है
जो किसी खालीपन में
नहीं घुसता


October 22, 2009 at 4:57pm

I will meet you yet again

I will meet you yet again
How and where
I know not
Perhaps I will become a
figment of your imagination
and maybe spreading myself
in a mysterious line
on your canvas
I will keep gazing at you.

October 21, 2009 at 9:47am

teri yaad

O mere dost
mere ajnabi -
Tinkon ki meri
jhonpri(hut),
Koi aasan
kahaan bichhaoon,
ki teri yaad ki
chingaari,
Mehmaan ban kar
aayi hai..

October 21, 2009 at 10:11am

चाय

इलायची के साथ
कॉफी: बनायीं :)
पर अदरक की चाय
के तुलना ....
कुछ नहीं :)
अभी भी
विचारों में
चाय :)



October 12, 2009 at 6:37pm

मां

'बेसन की सौंधी रोटी पर
खंट्टी चटनी जैसी मां
याद आती है
चौका, बेसन,
चिमटा, फूंकनी
जैसी मां,
आधी सोई,
आधी जागी,
थकी दोपहरी
जैसी मां।'

October 12, 2009 at 3:17am

dar

Baat Din ki nahi,
Ab raat se
dar lagta hai ....
Ghar hai kachcha mera,
Barsat se dar lagta hai :)


October 9, 2009 at 6:53pm

कोई नाम ना दो

हमने देखी हैं उन आंखों की महकती खुशबू ,
हाथ से छुके उसे रिश्तों का इल्जाम ना दो ,
सिर्फ़ एहसास हैं ये रूह से ही महसूस करों,
प्यार को प्यार ही रहने दो
..
कोई नाम ना दो ...

October 5, 2009 at 1:13am

schizophrenic

Why is it
when we talk
to God
we are
praying,
but
when God
talks to us,
we are
schizophrenic?


October 4, 2009 at 1:21am

Life

Life is a
celebration,
not
competition


October 2, 2009 at 12:55pm

dard

wo haseen dard
de do,
jise main
gale lagaa luu ..


September 13, 2009 at 8:52pm

बी लेट फार समथिंग डे

आज करे सो कल कर,
कल करे सो परसों,
इतनी जल्दी क्या है भइया,
जब जीना है बरसों।


September 7, 2009 at 12:57pm

dream

De Novo
dreaming !!

August 28, 2009 at 5:40pm

पराठा

गर्म गर्म
पराठा
खाना
चाहता हूँ

August 25, 2009 at 5:51pm

स्वाइन फ्लू

रक्षा करो
प्रभु
स्वाइन फ्लू
से
देश की


August 21, 2009 at 6:53pm

रंग

मुझे आज कोई और न रंग लगाओ,
पुराना लाल रंग एक अभी भी ताजा है.
अरमानों का खून हुये
ज्यादा दिन नहीं हुआ है.


August 21, 2009 at 12:35am

देखा मुझे

सामनें आये मेरे,
देखा मुझे,
बात भी की,
मुस्कुराये भी :)


August 21, 2009 at 12:35am

दिल की बात

दिल की बात जब दिमाग से
होकर जुबान पर आती है तो
बात बिल्कुल बदल जाती है
यह अलग बात है
जमाने को वही पसंद आती है.



August 21, 2009 at 12:28am

तुझे देख कर

तुझे देख कर जग वाले पर
यकीन नहीं क्यूं कर होगा
जिसकी रचना इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा.



August 21, 2009 at 12:25am

समीर

आकाश
में
बिजली की डरावनी तड़कन
बादलों की खूँखार गरजन
अपना आपा खोती
तेज मूसलाधार बारिश...

लगता है..

मेरी ही तरह
देख कर दुनियाँ की हालत..

कोई
उस पार भी
हैरान है

और

शायद
मेरी ही तरह
वो भी
परेशान है!!!

August 19, 2009 at 3:44pm

धरा बचाओ

धरा बचाओ,
पेड़ लगाओ


August 19, 2009 at 3:23pm

माया मरी ना मन मरा

माया मरी ना मन मरा,
मर मर गये शरीर,
आशा त्रिश्ना ना मरी,
कह गये दास विनोद


June 30, 2009 at 6:20pm

Pyaar Ke Do Naam

Pyaar Ke
Do Naam
Ek Raadha,
Ek Shyaam



May 29, 2009 at 2:56pm

chanda bina

chanda bina
chandni kesi ,
radha ke bina
shayam kesa..



May 28, 2009 at 11:50am

shayam aadha ...

Radha
ke bina
shayam
aadha ...



May 28, 2009 at 11:47am

Kitni Dilkash

Kitni Dilkash Hai Uski Khamoshi,
Sari Baten Phijul Ho Jaise


May 18, 2009 at 2:39pm