
प्रियतमा,
यहाँ से
शुरू हो रही है
यात्रा
पतझड़ से सर्दी की,
...प्रेम से बेचैनी की
खुशबुएँ प्रेम की
इन्तहा हो गयी है, ,
मेरे बाल लम्बे,
गाल निष्प्रभ
चाल मन्द
हो गयी है
बैठा हु तुम्हारे
इंतज़ार में
इन्तिज़ार-ए-धूप रहेगा .
इन्तिज़ार-ए-इश्क रहेगा,
इन्तिज़ार-ए-प्रेम रहेगा.

















