चेतना के रंग
Monday, December 13, 2010
रोक लेता था..
मैं बहुत दिनों से.. बहुत दिनों से
बहुत-बहुत सी बातें
तुमसे चाह रहा था कहना
पहले रोक लेता था..
...
तुम्हारी खिड़की का उजाला
और आजकल अँधेरा . :)
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