Monday, December 13, 2010

देखता रहूँ


मध्यरात्रि में
प्यारी और भोले और निश्छल
भाव से
सोई हुई है
गहरी नींद में
...कितनी शान्त
एक मिठास लिए
होंठों पर एक मौन स्मिति
खिली हुई है
मेरा मन होता है
रात भर जागकर
उसे इसी मुद्रा में
देखता रहूँ

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