काश में भावो को पिरो पाता
तेरी भाषा में,
काश तुम समझती ,
फूलो का खिलना,
सावन की धड़कन,
तड़पती बरसात को,
तो शायद में
धुऎ में
प्यास में ,
तलाश में,
सेंकड़ो अधूरे प्रेमो के,
अभिनय में,
खुद को खो ना जाता।
- August 6, 13
तेरी भाषा में,
काश तुम समझती ,
फूलो का खिलना,
सावन की धड़कन,
तड़पती बरसात को,
तो शायद में
धुऎ में
प्यास में ,
तलाश में,
सेंकड़ो अधूरे प्रेमो के,
अभिनय में,
खुद को खो ना जाता।
- August 6, 13
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