भोतिकता में उलझी सभ्यता,
क्या प्रेम, क्या विरह ,
क्या तरंग, क्या रंग,
क्या भावना, क्या सवेंदना
.......समझेगी,
प्रेम की बाते खूब कर सकते है, सब,
फिल्मे देख कर महसूस करते है,
स्वय को अहसासों की अभिनेत्री....अभिनेता
पर अंदर से खाली ,
नीरस हर्दय में ,
प्रेम नहीं,
बस अभिलाषा है,
चाह है, इच्छा है,
चेष्ठा है सुख की,
पर,
प्रेम कहा है, ..
-August 29, 2012
क्या प्रेम, क्या विरह ,
क्या तरंग, क्या रंग,
क्या भावना, क्या सवेंदना
.......समझेगी,
प्रेम की बाते खूब कर सकते है, सब,
फिल्मे देख कर महसूस करते है,
स्वय को अहसासों की अभिनेत्री....अभिनेता
पर अंदर से खाली ,
नीरस हर्दय में ,
प्रेम नहीं,
बस अभिलाषा है,
चाह है, इच्छा है,
चेष्ठा है सुख की,
पर,
प्रेम कहा है, ..
-August 29, 2012

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