भगत सिंह ने अपना
जीवन अंग्रेजो को,
देश से बाहर निकलने के लिए दिया,
और मनमोहन सिंह ने,
अपना जीवन उनको
वापिस लेन में समर्पित कर दिया है ,
आजादी के साठ सालो में,
दो सो सालो की लज्जित
गुलामी के कारणों को भूल जाना,
लोगो की भावनाओ की अभिवक्ति,
को क़ानूनी अपराध बनाना,
देश के लोगो का, उन्ही के देश में,
विदेशी कंपनियों का नौकर
बनाने का जो जोश और जज्बा,
इनमे दीखता है ,
बहुत चिंताजनक है,
काश इनको कैंब्रिज की पीएचडी के अलावा,
देश प्रेम भी कही सिखने को मिलता.
ऐसा अर्थशास्त्र का ज्ञान,
बिना भावना के प्रेम करने जैसा है.
-December 5, 2012
जीवन अंग्रेजो को,
देश से बाहर निकलने के लिए दिया,
और मनमोहन सिंह ने,
अपना जीवन उनको
वापिस लेन में समर्पित कर दिया है ,
आजादी के साठ सालो में,
दो सो सालो की लज्जित
गुलामी के कारणों को भूल जाना,
लोगो की भावनाओ की अभिवक्ति,
को क़ानूनी अपराध बनाना,
देश के लोगो का, उन्ही के देश में,
विदेशी कंपनियों का नौकर
बनाने का जो जोश और जज्बा,
इनमे दीखता है ,
बहुत चिंताजनक है,
काश इनको कैंब्रिज की पीएचडी के अलावा,
देश प्रेम भी कही सिखने को मिलता.
ऐसा अर्थशास्त्र का ज्ञान,
बिना भावना के प्रेम करने जैसा है.
-December 5, 2012

No comments:
Post a Comment