चेतना के रंग
Friday, July 23, 2010
प्यास
प्यास भी एक समन्दर है
समन्दर की तरह......
जिसमें हर दर्द की धार....
जिसमें हर ग़म की नदी मिलती हैं....
और हर मौज.....
लपकती है किसी
चाँद से चेहरे की तरफ़..... :)
January 15 at 12:52pm
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