Friday, July 23, 2010

सलीक़ा

उसको ख़ुश्बू के परखने का सलीक़ा ही नहीं ...
फूल को क़ीमत-ए- बाज़ार से पहचानती है


December 15, 2009 at 1:24pm

No comments:

Post a Comment