चेतना के रंग
Friday, July 23, 2010
बसंती हवा
बसंती हवा ....
मन पागल.....
प्यार की बातें........
सपने, आशा, मोह.......
गरम घूँट......
गुनगुनाती प्याली........
घिर-घिर उमडे..
बादल...
इन्द्रधनुषी धूप..
नशा ही नशा....
बुझती प्यास......
ओम्म्म्मम्म
April 12 at 3:12pm
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