चेतना के रंग
Friday, July 23, 2010
तुमसे मिलकर...
तुमसे मिलकर...
ऐसा लगा जैसे..
कोई पुरानी और प्रिय किताब....
एकाएक फिर हाथ लग गई हो
.............
समय की खुशबू...
प्राणों में भर गई....
उतर आया भीतर....
अतीत का चेहरा......
बदल गया वर्तमान.....
शायद भविष्य भी ।
January 11 at 3:15pm
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