Friday, July 23, 2010

जो कुछ रह गया

जो पूजायें अधूरी रहीं ,
वो व्यर्थ ना गयीं।
जो फूल खिलने से
पहले मुरझा गए ,
और नदियाँ रेगिस्तान
मे खो गईं,
वो भी नूस्त ना हुईं।
जो कुछ रह गया
जीवन में जानता हूँ !!!
निसफल ना होगा ,
जो मैं गा ना सका ,
जो बजा ना सका ,
हे प्रकृती !
वह तुमारे साज़ पे
बजता रहेगा । ।


March 11 at 7:38pm

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