चेतना के रंग
Friday, July 23, 2010
लकीरें
देखो तो
तुम्हारे हाथों में
उसके नाम की लकीरें
कितनी धुँधली हैं...
और उसकी लकीरों में
तुम्हारा नाम लिखा है...
शायद इसीलिए
वह तुमपर
जान छिड़कती है...
....
और तुम्हारी उससे
बस
जान पहचान भर है.....
October 22, 2009 at 6:33pm
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