Friday, July 23, 2010

अब न बतियाती राधा

पनघट पर आती ...
कोई राधा ..
अब न बतियाती ....
पनियारी हैं आँखें ....
अभिशप्त से हैं अधर ....
विधुर-सा लगता सारा गाँव ।


November 10, 2009 at 5:07pm

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