चेतना के रंग
Friday, July 23, 2010
खुद को नहीं
खुद को नहीं
औरों को देखने के लिए
लगाता हूँ चश्मा,
कि देखूँ मैं कैसा लगता हूँ
उनकी आँखों में
उनकी चुप्पी में,
कि याद आ जाए तो
उन्हें आत्मलीन क्षणों में ...
मेरी भी आइने में
अपने को देखते,
मुस्कराहट के छोर पर.
November 25, 2009 at 5:46pm
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