चेतना के रंग
Friday, July 23, 2010
मीत नहीं उम्मीद नहीं
मीत नहीं उम्मीद नहीं है ...
मन मन्दिर है खाली-खाली, ,
होठो होठोग़ज़लें .....
आँखों-आँखों इश्क की लाली ...
कैसे चुप्पी हम न तोड़ें ,
है उसकी हर नज़र सवाली ...
अब जग से क्या लेना देना...
पी ही ली जब प्रेम प्याली...
December 7, 2009 at 12:58pm
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