चेतना के रंग
Friday, July 23, 2010
भविष्य
जैसे ही भविष्य शब्द का स्वर निकलता है,
तब तक शब्द का पहला वर्ण
अतीत में जा चुका होता है,
जब सन्नाटा शब्द को बोलता हूँ,
उसी का विनाश करता हूँ
जब कहता हूँ कुछ नहीं,
कुछ नया बनता है
जो किसी खालीपन में
नहीं घुसता
October 22, 2009 at 4:57pm
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