Friday, July 23, 2010

चेतना की घाटी

चेतना की घाटी में तुम हो........
रिमझिम करती बरसात
........
मैं हूँ आकाश से झूलता
बादलों का चतुरंग.......
क्षण-क्षण अपने बदलते रूपों में
दृश्यमान..... :)


May 6 at 7:29pm

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